तुम ऐसा तसल्ली देने वाला बन कर भी कर सकते हो। मैं कभी कभार तुम्हारे पास आ कर कहता हूँ कि तुम गलत हो, परन्तु मैं तुम्हारे विरुद्ध दोष लगाने वाले का स्थान नही लेता। यदि मैं लूँ , तो मैं तुम्हे बर्बाद कर दूंगा।
यह सही है। आप प्रेम के साथ, नम्र और शान्त हो कर आते हो, ताकि मुझे पश्चाताप करने का मौका मिल सके और मैं अपने अन्दर की लड़ाई पर काबू पा सकूँ ।
यह सच है, मेरे बेटे । अक्सर तुम्हे पाप से मुक्ति पाने के लिए हफ़्तों, महीनों और वर्षों लग जाते हैं। मैं उन समयों में तुम्हारे विरुद्ध नही आता। मैं तुम्हारे साथ आता हूँ और तुम्हे शक्ति और प्रोत्साहन देता हूँ और शांति पूर्वक तुम्हारा इंतजार करता हूँ। तुम को भी ऐसा ही करना है उन लोगों के साथ जो संघर्ष कर रहे हैं।
और यदि किसी के पास कोई सिद्धांत है, तो तुम उसे एकदम मत ठुकरा दो या उसे दूर हटा दो, या पवित्र वचन से तुलना कर के उसे गलत साबित करो। तुम पवित्र वचन का सहारा ले कर उसे सही साबित करो और यदि ऐसा न कर पाओ तो उसे और विस्तार से समझाने दो। तुम किसी के विरुद्ध मत आना। फरीसी दोष लगाने वालों का स्थान लेते थे। वह शैतान का स्थान है । वह दोष लगाने वाला है प्रकाशित वाक्य 12:10
मेरा पवित्र आत्मा शांति देने वाला है (युहन्ना 16:7)। उस शांति देने वाले के स्थान को देखिये जो बिरियों ने लिया था जब पौलुस ने उन को नया सिद्दांत दिया था। थिस्लोनी दोष लगते थे और पौलुस को नष्ट कर देना चाहते थे । “बीरिया के लोग तो थिस्लुनिके के यहूदियों से भले थे, और उन्होंने बड़ी लालसा से वचन को ग्रहण किया, और प्रतिदिन पवित्र शास्त्र में ढूंढते रहे की ये बाते यों ही हैं कि नही। (प्रेरितों के काम 17:11)।
बीरिया, पौलुस को सही साबित करना चाहते थे और थिस्लोनी उन्हें गलत। एक दोषी की जगह है और दूसरी शांति देने वाले की।
तुम कभी दूसरों के विरुद्ध दोष लगाने वाले का स्थान मत लेना। शैतान का मुंह मत बनो। शैतान के मन को मत दर्शाओ। केवल मेरे मन को दर्शाओ। न्याय मेरा है । मैं लौटा ऊँगा, यूँ कहता है सेनाओ का प्रभु। प्रार्थना में लगे रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो।
निजी जवाब :
प्रभु, मैं क्षमा चाहता हूँ कि मैंने दोष लगाने वाले का स्थान लिया और अब से मैं केवल शांति देने वाले का स्थान लूँगा ।
धन्यवाद, मेरे बेटे । तुम्हारी ख़ुशी पूरी होगी। तुम्हारा प्याला उमंड रहा है ।
विचार करें और विवाद करें :
यहुन्ना 16:7, प्रेरित 17:1 ; प्रकाशित 12:10 पढ़िए
क्या तुम ने दोष लगाने वाले का स्थान लिया है? क्या तुम्हे पश्चाताप करने की आवश्यकता है ? यदि हाँ , तो क्या तुम पश्चाताप करने के लिए तैयार हो ? क्या तुमने शांति देने वाले का स्थान लिया है ? कैसे लगता है ? यदि हम एक दुसरे के विरुद्ध दोष लगाते रहें तो क्या हम स्थिर रह सकेंगे ? यदि हम एक दुसरे को चबाने और खाने में जुट जाएं, तो क्या हम ख़त्म नही हो जायेंगे ?
लेखक – मार्क विल्कलर

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