क्या आत्मिक पिता कह सकते हैं

आत्मिक पिता, गुरु और स्वामी लोग ध्यान से पढ़ें एवं कहने वाले भी ध्यान से पढ़ें

“परन्तु तुम रब्बी न कहलाना, क्योंकि तुम्हारा एक ही गुरु है: और तुम सब भाई हो।”

“और पृथ्वी पर किसी को अपना पिता न कहना, क्योंकि तुम्हारा एक ही पिता है, जो स्वर्ग में है।”

“और स्वामी भी न कहलाना, क्योंकि तुम्हारा एक ही स्वामी है, अर्थात् मसीह।

जो तुम में बड़ा हो, वह तुम्हारा सेवक बने।”

“जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा: और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा।” Matthew 23:8-12

(मतलब आप अपने आप को कभी रब्बी, पिता, स्वामी न बनाना और न कहलवाना)

रब्बी – मतलब गुरु वो एक ही है यानी पवित्र आत्मा – आप पवित्र आत्मा बन नहीं सकते।

पिता – मतलब यहोवा परमेश्वर सिर्फ एक ही है, दूसरा पिता पैदा करने वाला इसके अलावा कोई नहीं – यानी आप यहोवा परमेश्वर नहीं बन सकते।

स्वामी – मतलब मसीह यीशु यानी दुनिया मे कोई भी यीशु नही बन सकता।

क्योंकि यीशु ने खुद वचन को एक्सप्लेन कर दिया कि बड़ा बनना है तो सेवक बनो क्योंकि रब्बी, पिता, स्वामी कहलवाने लोग बड़े बन जाते हैं। और पिता, पुत्र, पवित्र आत्मा की जगह ले लेते हैं या बराबरी के बन जाते औऱ उनकी महिमा को लेते हैं। ये बहुत बड़ा पाप है।

ये वचन यीशु की आज्ञा है

यानी जो लोग अपने आपको आत्मिक पिता कहलवा रहे वो यहोवा परमेश्वर की जगह ले रहे औऱ पिता परमेश्वर की महिमा को स्वयं ले रहे हैं। औऱ वचन में लिखा है : Isaiah 48:11 अपनी महिमा मैं दूसरे को नहीं दूँगा।

John 12:48 जो मुझे तुच्छ जानता है* और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैंने कहा है, वह अन्तिम दिन में उसे दोषी ठहराएगा।

इस बात को ध्यान रखना है कि अंत मे वचन ही न्याय करेगा यदि चूक गए तो दोषी ठहर जाएंगे।

अक्सर खास कर सेवक लोग पौलुस की बराबरी करते हैं हो सकता है पौलुस से चूक हुई हो कारण यीशु ने पौलुस के सामने वचन नही कहे थे। क्योंकि बाइबल बहुत सालों बाद लिखी गयी थी। पौलुस ने सही कहा या गलत ये प्रभु जाने लेकिन लोग पौलुस की बराबरी करें कि पौलुस ने कहा तो हम भी अपने को आत्मिक पिता कह सकते हैं ये बात उचित नहीं है यदि पौलुस के जीवन को देखें तो वह यीशु की समानता में जीवन जिया है तभी उसने यहां तक कह दिया कि मेरी सी चाल चलो। तो ऐसा कोई सेवक है जो पौलुस के समान जीवन जिया हो ?

मेरा मानना है कि पौलुस को यदि मालूम होता कि यीशु ने मना किया है तो कभी भी पौलुस यीशु की कही बात को क्रास नहीं करता। और कभी नही बोलता की मैं आत्मिक पिता हूँ।

लेकिन महत्वपूर्ण बात इन वचनों में ये है जिसको सारांश बोल सकते कि यीशु ने ‘सेवक’ बनने के लिए बोला है क्योंकि यीशु कहा मैं सेवा कराने नही सेवा करने आया और यीशू ने अपने चेलों के पैर धोए। इसलिए यदि कोई अपने को आत्मिक पिता या गुरु या स्वामी कहलवाएगा वो सेवक नही बन सकता क्योंकि वह बड़ा बन गया है। औऱ वह लोगों के पैर धोए या जूते चप्पल उठाये दिखावा करने के लिए करता है क्योंकि विश्वास कर्म बिना अधूरा है और कर्म विश्वास बिना अधूरा है।

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि पौलुस कहता है कि सुसमाचार सुनाने के कारण तुम्हारा आत्मिक पिता हुआ यानी पौलुस ने अन्यजातियों को यहूदियों को बहुत सुसमाचार सुनाया जिन्होंने सुसमाचार कभी नही सुना न ही यीशु को जानते थे।

आज जो सेवक है उनमें से कितने अन्यजातियों को सुसमाचार सुनाते है ? बहुत कम सेवक।

जो सेवक अन्यजातियों को सुसमाचार सुना कर मसीह के पास लाते लगभग सेवक ताक में रहते की उनको कैसे लुभा कर अपने से जोड़ लें (चुरा ले)। और फिर उनका दोहन करें।

यानी जो अन्यजाति नए – नए निकल कर आते उनको पकड़ने की ताक में लगे रहते और जब वो उनकी गिरफ्त में आ जाते उन्हें बहला – फुसला कर अपने चर्च में जोड़ लेते और उनसे अपने को आत्मिक पिता कहलवाते और दसवांश देने के लिए दबाव बनाते। ऐसा करने वाले तो और वचन में चूक रहे हैं।

इसलिए अपने आप को शून्य करें, सच्चे सेवक बनें, अन्य जातियों को सुसमाचार सुनाए, जो यीशु ने भेड़ें दी हैं रखवाली के लिए उनकी ईमानदारी से सेवा करें, और उन भेड़ो को स्वर्ग में प्रवेश करने लायक बनाएं, छोटा बनें ताकि स्वर्गीय राज्य में बड़े किये जायें, क्योंकि हम को पिता ने अपने बच्चों की देख भाल करने के लिए नियुक्त किया है, यदि राजा के बच्चे जो राजकुमार के समान हैं जब राजा आएगा तो सेवको से हिसाब लेगा और जिन सेवको ने राजा के बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया होगा उनको डरा – धमका कर ठगा या लुटा होगा, चाहे रुपयों से, खाने – पीने से, अपनी जरूरतें बता कर, या डरा कर उन्हें बांध कर रखा होगा, देख – रेख अच्छे से नही की होगी, उनको सही शिक्षा नही दी होगी, यीशु से नही जोड़ा होगा, घरों के अंदर मेल – मिलाप न करवा कर फूट डलवाई होगी, पक्षपात किया होगा, यीशु के बच्चों की सभा मे बेज्जती की होगी, ठोकरें मारी होंगी, पिता उनका क्या हश्र करेगा समझ सकते हैं।

सेवकों का डबल न्याय होगा :-

  1. यीशु की भेड़ों का हिसाब देना होगा
  2. खुद का भी हिसाब देना पड़ेगा।

प्रभु आप सभी को आशीष दे आमीन

प्रभु यीशु मसीह में आपका सेवक
Apostle Rakesh Lal
Mob. No. 9981098303


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