आज बहुत से झूठे पास्टर और प्रचारक सुसमाचार नही सुनाते जबकि पौलुस कहता है:- Romans 1:1, 9
“पौलुस की ओर से जो यीशु मसीह का दास है, और प्रेरित होने के लिये बुलाया गया, और परमेश्वर के उस सुसमाचार के लिये अलग किया गया है।”
★ सुसमाचार के लिए अलग किया गया ★
तो ये पास्टर प्रचारक सुसमाचार क्यों नही मानते और सुनाते “परमेश्वर जिस की सेवा मैं अपनी आत्मा से उसके पुत्र के सुसमाचार के विषय में करता हूं, वही मेरा गवाह है; कि मैं तुम्हें किस प्रकार लगातार स्मरण करता रहता हूं।”
★परमेश्वर के पुत्र के सुसमाचार ★ ●★ 1 यूहन्ना 2:24 ★
“जो कुछ तुम ने आरम्भ से सुना है वही तुम में बना रहे: जो तुम ने आरम्भ से सुना है, यदि वह तुम में बना रहे, तो तुम भी पुत्र में, और पिता में बने रहोगे।”
इस वचन का मतलब
सुसमाचार जो यीशु ने सुनाया आज कल के पास्टर प्रचारक नही सुनाते पात्रियो से प्रचार करते हैं और लोगों को उद्धार पाने से वंचित कर देते है जबकि पत्रियां पवित्र आत्मा से भरी हुई कलीसियाओं को लिखी गई थीं
“पर जो विवादी हैं, और सत्य को नहीं मानते, बरन अधर्म को मानते हैं, उन पर क्रोध और कोप पड़ेगा।”रोमियों 2:8
सत्य यीशु है और वचन भी यीशु है और परमेश्वर का वचन सत्य है “यीशु ने कहा मार्ग , सत्य और जीवन मैं ही हूँ।”
आदि में वचन था वचन परमेश्वर के साथ था और वचन देहधारी हुआ मत्ती, मरकुस, लूका , यहुन्ना, प्रेरित 1:1…8
तक यीशु मसीह के मुँह से कहे गए वचन हैं जिनको 4 सुसमाचार कहा जाता है और यीशु ने अपनी ओर से कुछ नही कहा जैसा पिता ने कहा वैसा बोल दिया
“क्योंकि मैं ने अपनी ओर से बातें नहीं कीं, परन्तु पिता जिस ने मुझे भेजा है उसी ने मुझे आज्ञा दी है, कि क्या क्या कहूं? और क्या क्या बोलूं?” “और मैं जानता हूं, कि उस की आज्ञा अनन्त जीवन है इसलिये मैं जो बोलता हूं, वह जैसा पिता ने मुझ से कहा है वैसा ही बोलता हूं।।” John 12:49,50
प्रेरितों के काम 1:9 में यीशु स्वर्ग उठा लिए गए प्रेरितों 1:12 से 26 तक यीशु के चेले और 109 लोग यीशु की आज्ञा का पालन कर रहे थे और वे 10 दिन तक प्रार्थना करने में लवलीन थे प्रेरितों के काम 2:1…4 पवित्र आत्मा का आगमन होता है और 120 लोग पवित्र आत्मा से भर जाते हैं और अन्य अन्य भाषा बोलने और भविष्यवाणी करने लगते हैं अब प्रेरितों के काम 2:4 से 28 अध्याय तक पवित्र आत्मा के कार्य की पुस्तक भी कह सकते हैं प्रेरितों के कार्य के दौरान जगह जगह लोग भारी मात्रा में पवित्र आत्मा से भरते उद्धार पाते और वहां वहां लोग इकट्ठे किये जाते और कलीसिया की स्थापना कर दी जाती थी अब जब सब कलीसियाओं की स्थापना हो गई तब वहां गड़बड़ी भी होने लगी और गलत शिक्षा भी लोग देने लगे तब पौलुस ने उन पवित्र आत्मा से भरी कलीसियाओं को ख़त यानि पत्री लिख कर समझाया उन पात्रियो में बहुत सी बातें ऐसी हैं जिनको समझना बहुत कठिन है
★पतरस भी इस बात को समझा रहा है★
◆पौलुस ने भी उस ज्ञान के अनुसार जो उसे मिला ◆
●पत्रियां सुसमाचार नही है।●
“और हमारे प्रभु के धीरज को उद्धार समझो, जैसे हमारे प्रिय भाई पौलुस ने भी उस ज्ञान के अनुसार जो उसे मिला, तुम्हें लिखा है।”
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आप ग्रुप में देखिये अनपढ़ और चंचल पास्टर, प्रचारक और पत्रियों के अनुसार अपने को विश्वासी समझने वाले लोग सुसमाचार की बातो की तरह खींच तान कर अपने और लाखों लोगों के नाश का कारण बनाते हैं ( यीशु ने विश्वासियों के 5 चिन्ह बताये नही मानते है और न ही मानने देते हैं यीशु की बातो को ठुकरा रहे हैं – नष्ट हो जायेंगे और बहुतों के जीवन को नष्ट कर दिए है और कर देंगे।
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“वैसे ही उस ने अपनी सब पत्रियों में भी इन बातों की चर्चा की है जिन में कितनी बातें ऐसी है, जिनका समझना कठिन है, और अनपढ़ और चंचल लोग उन के अर्थों को भी पवित्र शास्त्र की और बातों की नाईं खींच तानकर अपने ही नाश का कारण बनाते हैं।”
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4 सुसमाचार 1. मत्ती, 2. मरकुस 3. लूका, 4. यहुन्ना = यानि चार मजबूत नींव जिस पर बुलंद इमारत बनती है यदि नींव कमजोर है तो उस पर इमारत भी जर्जर बनेगी और कभी भी गिर जायेगी और कई गिर भी चुकी हैं और कई गिरने वाली हैं उसी तरह जो आपको यानि पहली या दूसरी क्लास के बच्चों को
(5वीं क्लास मतलब प्रेरितों के काम जब आप पवित्र आत्मा से भरते और आत्मा के कार्यों से वाकिफ होते इसको तो हटा ही दिया )
सीधे 6वीं क्लास यानी (रोमियों की कलीसिया को लिखा गया खत) 7वीं यानी 1कुरिन्थियों ,2 कुरिंथि. गलातियों क्रमश : सभी का खत का कोर्स पढ़ाये और जब आपके सामने प्रश्न पत्र आये तब आपने अपनी क्लास का कोर्स तो पढ़ा ही नही तो आप फेल हो जाओगे आपका साल के साथ जीवन नष्ट न हो जायेगा तब आप क्या करेंगे ।
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इसलिए आप लोग समझ जाएँ जो आपको पवित्र आत्मा का बपतिस्मा दिलाने और अन्य अन्य भाषा बोलने यानि उद्धार की बात न करे वो चाहे पास्टर हो चाहे प्रचारक हो अधर्मी है आपको भ्रम में फंसा कर आपके जीवन को नष्ट कर देना चाहता है। ऐसे लोगों को पहचानो और दूर भाग जाओ।
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“इसलिये हे प्रियो तुम लोग पहिले ही से इन बातों को जानकर चौकस रहो, ताकि अधर्मियों के भ्रम में फंसकर अपनी स्थिरता को हाथ से कहीं खो न दो।”2 Peter 3:15-17
सब से पहले सुसमाचार सुनाया जाता है जिससे आप मसीह के जीवन मसीह की आज्ञाओं को धारण कर सब प्रकार की बुराई , बुरे काम, अभिलाषाएं ,सांसारिकता को त्याग कर अपने मन को फिराएं और पश्चाताप करें फिर प्रेरितों के काम में पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पाओ और अन्य अन्य भाषा बोलने लगो और पवित्र आत्मा जो सब के गुरु हैं बाइबल के महान शिक्षक है उनको और उनके कार्यों को जानने के बाद अब पत्रियों में आ जाइए जिनमे पवित्र आत्मा पाने के बाद हमे कैसा जीवन जीना चाहिए अब आप लेपालक पुत्र बन गए हो आत्मा कैसे आपके अंदर से आहें भर भर कर प्रार्थना करता है आपको पवित्र आत्मा की अगुवाई में चलना है जिससे आप परमेश्वर के पुत्र और पुत्रियां बनने पाओ मरने के बाद कैसे पवित्र आत्मा के द्वारा जिलाये जाओगे , किन बातो से दूर रहना चाहिए क्या चीजे खानी नही चाहिए फिर पवित्र आत्मा पाने के बाद वरदानों के विषय में कौन कौन से वरदान होते हैं कैसे कब मिलते है कैसी कलीसिया होनी चाहिए कितने प्रकार की सेवकाई होती हैं, पवित्र आत्मा पाये व्यक्ति को कैसे अपने अंदर से प्रेम की नदी को उमड़ना चाहिए उसके बाद अन्य भाषा बोलने का क्या मतलब होता है, अन्य भाषा बोलने से क्या होता है, भविष्यवाणी क्या होती है करने से क्या होता है, अन्य भाषा को सुनने के बाद भी जो नही मानते और नही बोलते वो कौन है, अन्य भाषा कब और कहाँ बोलनी है कहाँ नही बोलनी है कहाँ अपने अंदर आत्मा में प्रार्थना करनी है, पवित्र आत्मा की अगुवाई में कैसे चलना ,पवित्र आत्मा के 9 फलों के विषय में जानना, अब आप जीवित नही हैं मसीह आप में जीवित हैं , अब आप मसीह में कौन हो आप कहाँ बैठे हो मसीह कौन है आपको कैसी प्रार्थना करनी चाहिए , परमेश्वर के 6 हथियार कौन कौन से हैं कैसे धारण करें पवित्र आत्मा हथियारों से कैसे सुसज्जित करते हैं आदि बहुत सारी बातें जो आपके आत्मिक जीवन को और ज्यादा मजबूती प्रदान करती हैं ये एक सिस्टम के अंतर्गत बातें लिखीं हैं इसलिए नए नियम की शुरुआत क्रमश: मत्ती , मरकुस, लूका, यहुन्ना, फिर प्रेरितों के काम , इसके बाद कलीसियाओं को पौलुस के 14 पत्र , और चेलों के पत्र जो रोमियों से लेकर यहूदा की पत्री तक उसके बाद यहुन्ना का प्रकाशितवाक्य यानि अंत की पुस्तक आपको कैसे तैयार रहना है किन किन बातो से अलग रहना , अपने को जांचना और जाग्रत करना कैसी कलीसिया उठाई जायेगी कौन लोग जायेंगे कौन नही जायेंगे यीशु के स्वरूप का चित्रण, 666 की छाप के विषय में और भी बातें जो अंत में घटेंगी उसका पूरा चित्रण है ये सब किताबें क्रमश: यानी सीरियल से हैं ताकि आप स्टेप बाय स्टेप आत्मिक जीवन में जड़ पकड़ते बढ़ते जाएँ और अनंत जीवन में प्रवेश कर जाएँ नए नियम में ऐसा क्यों नही किया प्रकाशित वाक्य पहले होता फिर पत्रियां उसके बाद सुसमाचार होता या पत्रियां पहले जैसे की आजकल के पास्टर प्रचारक पढ़ा रहे है उसके बाद में प्रकाशित उसके बाद सुसमाचार हम इसलिए लिख रहें है भाइयो और बहनों आपका जीवन बहुमूल्य है परमेश्वर पिता ने आपसे प्रेम की खातिर अपने पुत्र को बलिदान होने के लिए दे दिया और यीशु ने अपने आपको आपकी खातिर बलिदान किया और अपना कीमती रक्त बहा कर आपको मोल ले लिया और आप पर अनुग्रह किया कि आप उद्धार पाओ आपकी आत्मा नष्ट न हो । यहुन्ना 6:44 आपको पिता ने खींच कर बंधुआई से शैतान की गुलामी से मिस्र देश से निकाला और लाल सागर पार जंगल में अपने पुत्र प्रभु यीशु के पास लाया इतने महान बलिदान के बाद भी आप यदि उद्धार नही पाते यानि आप जंगल से प्रतिज्ञा के देश में प्रवेश नही कर पाते
(प्रतिज्ञा मतलब योएल 2:28,29,30; लूका 1:49; प्रेरित 1:4 में जिस प्रतिज्ञा की बात यीशु कह कर चलो को यरूशलेम में रोके और और प्रतिज्ञा प्रेरित 2:1..4 में पूरी हुई प्रेरित 2:16..20 जो प्रतिज्ञा योएल नबी की पुस्तक में की थी “कि अंत के दिनों में मैं अपना आत्मा सब मनुष्यों पर उंडेलूंगा।” )
और यदि आपकी आत्मा नष्ट हो जाती है तो आपके जीवन के लिए यीशु का बलिदान, यीशु का कीमती लहू और यीशु का अनुग्रह आपके जीवन में व्यर्थ चला गया आप प्रतिज्ञा के देश में प्रवेश ही नही करने पाये और जंगल में ही नष्ट हो गए
प्रभु यीशु मसीह में आपका सेवक
Apostle Rakesh Lal
Prayer Tower – 9981098303/ 8319805610

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