पवित्र आत्मा कि सहभागिता का मतलब

_:: कैसा साहचर्य! ::

………………….पवित्र आत्मा की सहभागिता तुम सब के साथ होती रहे। 2 कुरिन्थियों 13:14

बाइबल के अनुसार साहचर्य का अर्थ क्या होता है ? इसके सात अर्थ होते हैं।


पहला, :- साहचर्य शब्द का अर्थ है उपस्थिति। आपके प्रति पिता ईश्वर की इच्छा यह है कि पवित्र आत्मा का सुसान्निध्य आपके साथ रहे।

दूसरा, ::– उसका अर्थ है साहचर्य। आपको पवित्र आत्मा से बिनती करने की जरुरत नहीं है; आप उनके साथ यों ही साहचर्य कीजिये। और आपको इस साहचर्य के लिये एक तृष्णा चाहिये जैसे आप मरुभूमि में पानी के लिये तरस रहें हों।

तीसरा, :: — अर्थ है आपस में बाटना। आप अपना दिल खोल कर उनके सामने रखते हैं और वे आपके सामने रखते हैं। आप अपना सुख बांटते हैं और वे अपना बांटते हैं। ‘‘वह पवित्र आत्मा को अच्छा लगा, और हमको भी ………’’ अन्ताखिया की कलीसिया को प्रेरितों ने लिखा (प्रेरितों. 15:28)। वे आपस में बांट रहे थे – यहाँ तक पत्रों के माध्यम से भी।

चौथा ,::– साहचर्य का अर्थ है सहभागिता। पवित्र आत्मा आपके हिस्से दार बन जाते हैं। बाइबल में ऐसे पद भरे पड़े हैं, उनके साथ कार्य करते, और आत्मा और हम, जो इसका स्पष्टीकाण करते हैं कि पवित्र आत्मा का कार्य आपके साथ सदा सहभागिता के साथ होता है।

पाँचवा, ::– इसका अर्थ है घनिष्टता। आप ख्रीष्ट के साथ एक अगाध प्रेम का अनुभव कभी नहीं कर पायेंगे जब तक कि आप वह प्रेम पवित्र आत्मा के साथ नहीं जानेंगें, जो आप में यह घनिष्ठता ला देते हैं। इसके सिवाय और कोई उपाय नहीं हैं। ईश्वर ने अपना प्यार पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है। (रोमियों 5:5)। आप पवित्र आत्मा के बिना ईश्वर को प्यार नहीं कर सकते।

छठा, ::– इस शब्द का अर्थ है मित्रता। पवित्र आत्मा आपका घनिष्टतम् मित्र बनने के लिये तरसते हैं, जिनके साथ आप अपने दिल की सारी गुप्त बातें भी कह सकते हैं।

सातवाँ, ::– साहचर्य का अर्थ है मैत्री। यूनानी भाषा में अंग्रेजी शब्द का अर्थ (कमान्डर) होता है – वह एक कप्तान, एक शासक, अथवा एक मालिक के समान है – किन्तु एक स्नेही और सौम्य व्यक्ति। ऐसा ही, जैसा पवित्र आत्मा ने प्रेरितों को आदेश दिया कि उन्हें कहाँ – कहाँ जाना चाहिये, वैसे तो आपको अपने जीवन की वैयक्तिक बातों में भी पवित्र आत्मा को संचालन करने देना होगा। ध्यान दें, चूँकि ख्रीष्ट चले गये, इसलिये पवित्र आत्मा ही इस धरती पर कार्य सम्भाल रहें हैं।

क्या आप उनकी आवाज सुन रहें हैं ? क्या आप उनके साथ साहचर्य करने को तत्पर हैं ?

जब मैनें पवित्र आत्मा के साथ साहचर्य प्रारंभ किया, मैनें दिन और रात उनके साथ बात की।

एक दिन भी ऐसा नहीं गुजरा, जब मैनें यह नहीं कहा हो,

‘‘पवित्र आत्मा, परमप्रिय पवित्र आत्मा।’’ और हम लोंगों ने अपनी प्रार्थना एवं साहचर्य का मधुर क्षण शुरु किया।

आह, उसकी वाणी की आवाज।

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